जम्मू-कश्मीर राहत संगठन की ओर से कश्मीरी पंडितों को राशन के तहत मिलने वाली चीनी बंद कर दी गई है। कश्मीरी पंडितों को विस्थापन राहत के साथ-साथ निशुल्क राशन की सुविधा भी सरकार की तरफ से उपलब्ध कराई जाती थी।

इसके तहत उन्हें हर महीने नौ किलोग्राम चावल, दो किलोग्राम आटा और एक किलोग्राम चीनी दी जाती थी।

लेकिन अब राहत संगठन द्वारा कश्मीरी पंडितों को दिए जाने वाले राशन के नियमों में बदलाव किया गया है। अब उन्हें राशन में चीनी नहीं दी जाएगी। इस पर जगती निवासी कश्मीरी पंडितों का कहना है कि चीनी बंद कर देना गलत है। यह सुविधा 1990 से दी जा रही थी और इसे आगे भी जारी रखा जाना चाहिए था।

वहीं इस संबंध में जगती के सुनील पंडित ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह कश्मीरी पंडितों को दिवाली के तोहफे के रूप में दिया गया है।

राहत संगठन के आयुक्त टीके भट्ट का कहना है कि यह सरकारी आदेश है कि राशन में दी जाने वाली चीनी बंद कर दी जाए। जितना भी स्टॉक था उसे वितरित किया जा चुका है और इस महीने से नियमों में हुए बदलावों को लागू कर दिया जाएगा और कश्मीरी पंडितों को मुफ्त राशन के रूप में चीनी नहीं दी जाएगी।

 

 


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