देश में आजादी का बिगुल वकील ने ही बजाया था इसलिए वकील ही आजाद भारत का पहला पी एम भी हुआ। वकील पर हाथ डालने की वजह से ही अंग्रेजों को भारत छोड़ना पड़ा था। क्योंकि वकील के बारे में कहा गया है वकील दोषी को निर्दोष और बेगुनाह को गुनाहगार भी सिद्ध कर सकता है।

वकील में जज से ज्यादा पावर होती है जज तो केवल उसके द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य, तथ्य, दलील आदि पर अपना फैसला देता है जो उसे उसी के हिसाब से देना पड़ता है वकील के कारण इंद्रा गांधी तक को जोर-जोर से रोना पड़ गया था। उनकी संसद सदस्यता छीन ली गई थी। आज तो महामहिम पर कायरता के नपुंसकता के आरोप लग रहे हैं। मगर हराम अरहीम को जेल भेजने वाले जगदीप को भी भूले नहीं हैं लोग।

वकील के बारे में कहा गया है-
पैदा हुआ वकील तो शैतान ये बोला
लो हम भी आज साहिबे औलाद हो गए

वकील ने ही फांसी लगने के बाद व्यक्ति जिंदा बचा लिया था तब कानून में हैंग के बाद टिल डेथ जोड़ना पड़ा था। गांधी, नेहरू, पटेल, राजेंद्रप्रसाद, अम्बेडकर आदि सब वकील थे अथवा ये कहिए आजादी में वकील वर्ग का भारी योगदान ही नहीं है वे ही आजादी के अग्रवाहक थे। वकील बुद्धिजीवी वर्ग में ही आता है उसे कुत्ते का मांस खिलाओगे तो अपने बारे में भी सोच लो। पुलिस प्रशासन की भूमिका भी सर्वविदित है।माना कि कानून से जुड़े व्यक्ति को ही कानून हाथ में नहीं लेना चाहिए मगर हर तरफ सँविधान कानून से खिलवाड़ करने वाले लोगों को संरक्षण मिल रहा है उसके बारे में कौन सोचेगा हराम अरहीम को बचाने की कोशिश जारी है चिन्मयानंद, सेंगर, बच्चियों को चबाने चबवाने वाले लोगों को संरक्षण मिलना क्या सही है? हर दल के समर्थक गुंडे हो सकते हैं दल उनकी मदद भी लेते हैं। जब उनकी पोल खुले तब तो उनसे किनारा करिये इससे तो यही संदेश जाएगा बचाने वाले उनके साथ गम्भीर गुनाहों-पापों में भागीदार हैं। आज भी इस देश को वकील ही चला रहा है मेरा मतलब सँविधान से है जो एक वकील ने ही बनाया था। सिब्बल, सुब्रह्मण्यम, जेठमलानी, ओवैसी, चिंदम्बरम, सलमान खुर्शीद, मनु सिंघवी आदि की बड़ी सूची है जो अभी भी सत्ता से जुड़े हैं।

पुलिस पर हाथ उठाना यूँ ही नहीं हुआ पुलिस ने अपनी गरिमा खुद खो दी है। वह जब अपराधियों को संरक्षण देने लगे उनके इशारों पर नाचने लगे तो उसके साथ ये सब होना कोई विशेष बात नहीं। पुलिस की तरह वकील वर्ग में भी सभी तरह के लोग हैं मगर जहाँ तक हाथ उठाने की बात है जब तक किसी गम्भीर अपराध में संलग्नता न हो वकील एक सम्मानीय व्यक्ति माना जाता है उसपर हाथ नहीं उठाया जाता। जबकि झड़प का मुद्दा पार्किंग बताया जा रहा है जो अपराध से जुड़ा नहीं है। पुलिस पर वकील वर्ग की और जनसुरक्षा की भी जिम्मेदारी है। हर विभाग, वर्ग की अपनी महत्ता है। कर्तव्यनिर्वहन में ही सब कुछ शोभायमान है।

हमारे सात आठ परिजन पुलिस में और इतने ही वकील हैं इसलिए वो कहावत है न गोद का भी प्यारा और पेट का भी प्यारा वाली बात है बस दोनों वर्ग संयम और विवेक से काम लें ताकत और जोश दिखाना है तो देशहित में दिखाएं। पति, दो देवर, दो नंद, एक नंदोई, एक देवरानी वकील हैं। परिवार में चार जज भी हैं। दो बहनोई, एक भाई, दो भांजे पुलिस में इसलिए धर्मसंकट में हैं। पुलिस जान पर खेलकर अपराधी पकड़ते वकील जज जान पर खेलकर उन्हें सजा देते हैं। वोटों या अन्य लोभ भय के लिए जनता के अंधविश्वास का फायदा उठाकर उन्हें बचाने का प्रयास किया जाए तो उसे क्या कहा जाए? वकील, पुलिस, जज, अदालतें सब जनता की सेवा उसके हितों के संरक्षण न्याय के लिए बने हैं न कि सत्ता की चाकरी के लिए। सत्ता खुद अपराधियों से छुटकारे जनता की सेवा चाकरी, संरक्षण उन्हें न्याय देने के लिए चुनी जाती है। आज अपराध के राजनीतिकरण के दौर में दोनों वर्ग की ही नहीं हर वर्ग की, हर व्यक्ति की जिम्मेदारी देश के लिए बढ़ गई है। अतः देश बचाएं अहंकार छोड़ जनहित के साथ रहें।

 

 


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