मांट, मथुरा की प्रसिद्द नागाबाबा की गोशाला पर भू माफिया काबिज है जिससे यहाँ पल रही 500 गायों की जान को खतरा उत्पन्न हो गया है।

गोशाला से जुड़े 20 वर्ष पुराने कार्यकर्ता ने संचालकों पर गंभीर आरोप लगाए हैं कि पिछले कुछ वर्षों से मुख्य संचालक नागाबाबा की बढ़ती बिमारी और असक्षमता के कारण कर्मचारियों की लापरवाही से गत चार माह में अनेकों गाय मर चुकी हैं। गोशाला यमुना के किनारे होने की वजह से गायों के मरने पर नदी में बहा दिया जाता है जिसका गाँव वासियों को पता भी नहीं चलता। गायों को लोहे की रॉड से मारा जाता है जिससे उनकी हड्डियां टूट जाती हैं। बैलों को रात को गायों के बीच बाँध दिया जाता, सुबह दो-चार गाय जमीन पर लेटी मिलती हैं। किसी कारणवश गाय घायल हो जाए तो उसका इलाज नहीं किया जाता और घाव को खुला छोड़ दिया जाता है जिससे गोशाला के कुत्ते उनका खून और मांस खाने लगते है। गौशाला में गाँव के दर्जनों आवारा कुत्ते और भेड़ियों का आतंक बना हुआ है।  

कार्यकर्ता ने आरोप लगाया है कि नागाबाबा की असहाय अवस्था के कारण गोशाला का संचालन गोविन्दगिरी के हाथों में आने बाद से गोशाला भू-माफिया और असामाजिक तत्वों का अड्डा बन कर रह गयी है। गौ दान से गायों का ख्याल रखने के बजाय केवल जमीन और बिल्डिंगों के बारे में ही लड़ाई लड़ी जा रही हैं। आये दिन होने वाले भू विवादों में बाहुबल, क़ानून और पुलिस की दखलअंदजी बढ़ती जा रही है। पुराने सभी गोसेवकों को मार-पीट कर भगाया जा रहा है और ग्रामवासियों को धमकियां दी जा रही है कि गोशाला में किसी को कदम नहीं रखने दिया जाएगा।

कार्यकर्ता ने कहा कि गोविन्दगिरी के आने के बाद से नागाबाबा के संचालन में चल रही एटा व इटावा की गोशालाएं पूर्णतः बंद हो चुकी है। मांट में पुरानी गोशाला भूमालिकों के साथ कानूनी विवाद होने के कारण बंद हो गयी है। इस गोशाला में बनी दुकानों के सभी किरायेदारों को खाली करने के लिए परेशान कर रहे हैं ताकि उन्हें ऊँचे दामों पर बेचा जा सके। बेलवन गाँव की एक अन्य गोशाला में पहले डेढ़-दो सौ थी मगर अब वहां न गाय है न गोशाला।

कार्यकर्ता ने बताया कि गायों की सेवा के नाम पर नागाबाबा अपने नागा संत स्वरुप को दिखाकर दान बटोर रहे हैं मगर गोविन्दगिरी उस दान को गौ सेवा में न लगाकर अन्यत्र भूमि खरीदने, बिल्डिंग बनवाने और अपने निजी स्वार्थों में उपयोग कर रहे हैं। नागाबाबा अंधे धृतराष्ट की तरह अपने तथाकथित शिष्य गोविन्दगिरी पर लगे आरोपों को खारिज कर देते हैं और उसके गलत कामों में उसका साथ देते हैं। 

कार्यकर्ता ने बताया कि गोशाला की व्यवस्था भी पूर्ण रूप से चौपट है। संस्था में प्राप्त दान का कोई हिसाब किताब नहीं रखा जाता और न ही खर्चों कोई विवरण। गोशाला पंजीकृत संस्था है पर इसे नागाबाबा की निजी फर्म की तरह चलाया जा रहा है। संस्था के खातों के अतिरिक्त नागाबाबा के अलग-अलग नाम से SBI, PNB और अन्य बैंकों में खाते चल रहे हैं। नागाबाबा का कोई निजी व्यवसाय नहीं हैं फिर भी उनके इन खातों में लाखों रूपये का लेनदेन होता है जिसका उपयोग नागाबाबा अपने स्वेच्छा से कर रहे हैं। संस्था को प्राप्त गौ दान से नागाबाबा ने कई सम्पत्तियाँ अपने व अपने ख़ास लोगों के नाम से खरीदी हैं जिनका रिकार्ड उपलब्ध है। जब कोई दानदाता हिसाब पूछने या कुछ जानने की कोशिश करता है तो उस पर झूठे आरोप लगाए जाते हैं गोशाला हड़पना चाहता है। गोविन्दगिरी के इस रवैये और दान का हिसाब न पाने के कारण संस्था के अनेक दानदाताओं ने दान देना बंद कर दिया है।

गोशाला की संस्था के कोषाध्यक्ष ने भी आरोप लगाया है कि संस्था के नाम से ICICI और SBI बैंक में खाते भी नियानुसार नहीं चलाये जा रहे। जब से उन्होंने पद संभाला है उन्होंने किसी प्रकार के खातों का कोई विवरण नहीं दिया गया है, जिस बाबत उन्होंने बैंक व सम्बंधित विभागों में शिकायत भी की है।

गोशाला की बदतर हालत का ब्योरा देते हुए कार्यकर्ता ने सरकार के विभिन्न विभागों से उच्चस्तरीय जांच की मांग की है और कहा है कि गोशाला में पल रही लगभग 500 गायों की सुरक्षा हेतु सरकार की ओर से तुरंत प्रशासक नियुक्त किया जाए।