पीठ पर लात पड़ी, जान की धमकी मिली, फिर भी अपनी ड्यूटी पर डटी रही ये पत्रकार। डॉक्टर के पास नहीं, पहले फुटेज देने ऑफिस गईं शाजिला

सबरीमाला मंदिर में औरतों के प्रवेश को लेकर 2 जनवरी 2019 से शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन थमने का नाम ही नहीं ले रहा है. 2 तारीख की सुबह दो औरतों ने अयप्पा के दर्शन करने के लिए मंदिर में प्रवेश कर लिया. उन्होंने इसका वीडियो भी जारी किया. इसके बाद तो लोगों की भावनाएं इतनी ज़्यादा आहत हो गईं कि उन्होंने इसके विरोध में प्रोटेस्ट करने शुरू कर दिया.

लोगों के गुस्से का ये आलम है कि वो पत्रकारों पर भी हमला कर रहे हैं. विरोध को कवर करने तिरूवनंतपुरम पहुंची कैमरापर्सन, शाजिला अली फातिमा पर विरोध करने वाले लोगों ने हमला किया. उनका कैमरा छीनने की कोशिश की. उनके गले में चोट आई. वो इस घटना से इतना व्यथित थीं कि उनकी आंखों में आंसू आ गए. इसके बावजूद वो अपने काम पर जुटी रहीं. उन्होंने कैमरे को पकड़े रखा और विरोध प्रदर्शन की शूटिंग करती रहीं. उनकी तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई. 'डूल न्यूज़' के मुताबिक वो कहती हैं-

'मैं भाजपा और उनके लोगों से नहीं डरती हूं. मैं भाजपा की ऐसी हरकतों को भविष्य में भी अपने कैमरे में कैद करती रहूंगी.'

शाजिला पर हुए हमले और शाजिला के बीजेपी को दिए जवाब से जुड़ी खबर 3 जनवरी, 2018 के 'मातृभूमि' अखबार में भी छपी है. शाजिला ने कहा-

'जहां भी हमले होंगे, पत्रकार उन घटनाओं को कवर करने के लिए ज़रूर जाएंगे. अगर आर.एस.एस. के लोग पुलिस को पीटते हैं, तो हम दुनिया को बताएंगे. बीजेपी से हमारी कोई दुश्मनी नहीं है. घटनाओं को रिपोर्ट करना ही हमारा काम है.'

मंदिर में औरतें के जाने के बाद मंदिर का शुद्धिकरण किया गया. सुबह 10:35 पर मंदिर को बंद कर दिया गया, ताकि शुद्धिकरण किया जा सके. मंदिर के मुख्य पुजारी कंदरारू राजीवरारू ने 'द हिंदू' को बयान दिया-

'धार्मिक विश्वास, परंपराओं और रीति-रिवाज़ों के कारण महिलाओं का सबरीमाला के अयप्पा मंदिर में जाना मना है. इसे महिलाओं के खिलाफ भेदभाव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि सबरीमाला में महिलाओं के आने पर कोई प्रतिबंध नहीं है.'

रिपोर्ट्स के मुताबिक बिंदू(44) और कनकदुर्गा(42) नाम की महिलाएं मंदिर में गई थीं. इन महिलाओं ने पहले भी मंदिर में जाने की कोशिश की थी. कट्टरपंथियों के विरोध के कारण ये तब मंदिर में नहीं जा पाई थीं. पुलिस इन्हें सुरक्षित वापस ले आई थी. अब भी दक्षिणपंथी लोग महिलाओं के मंदिर में जाने का विरोध कर रहे हैं. भाजपा के कार्यकर्ताओं ने इन दोनों औरतों, और महिलाओं के मंदिर में जाने के विरोध में प्रदर्शन करना शुरू कर दिया है.

शाजिला ने इस घटना के बारे में विस्तार से बताया. उन्होंने कहा-

'2 जनवरी को मुझसे कहा गया था कि मैं बीजेपी के नेताओं से बिंदू अम्मीनी और कनकदुर्गा के सबरीमाला में घुसने वाले मुद्दे पर रिऐक्शन लेकर आऊं. मैं सेक्रेटेरिएट के सामने कई हफ्तों से भूख हड़ताल पर बैठे बीजेपी नेताओं से बात करने लगी. बात करने के बाद मैं ऑफिस जाने के लिए निकली. उसी वक्त लोगों का एक समूह सेक्रेटरिएट की ओर मार्च करता हुआ निकला. उन्होंने लेफ्ट पॉलिटिकल पार्टियों के लगाए होर्डिंग और बैनर फाड़ दिए और पत्रकारों पर हमला शुरू कर दिया. जब मैंने इस हमले को शूट करना शुरू किया, तो भीड़ ने मुझे धमकी दी. भीड़ ने मुझे जान से मारने की धमकी दी. मैंने धमकी को अनसुना कर दिया, लेकिन मुझे झटका तब लगा, जब मेरी पीठ पर एक लात पड़ी. मेरे प्रोफेशनल करियर का ये सबसे बुरा वक्त था. जब मेरा कैमरा स्विच ऑफ हो गया तो मुझसे वो तस्वीरें और वीडियो छूट गए, जिस दौरान भीड़ ने मेरे ऊपर हमला किया था. दो घंटे बाद ये सब खत्म हुआ तो मैं चाहती थी कि डॉक्टर के दिखाने से पहले मैं सभी फोटो और वीडियो ऑफिस में जमा कर दूं. मेरे लिए ड्यूटी पहले थी. मैं खुश हूं कि ऐसी स्थिति में भी मैं अपना काम कर रही हूं.'

शाजिला सीपीएम के न्यूज़ चैनल कैराली टीवी में काम करती हैं. सात साल तक कैराली टीवी में डेस्क पर काम करने के बाद 2013 में शाजिला कैमरापर्सन बनी थीं. इसके बाद उन्होंने कई विधानसभा चुनाव कवर किए, केरल की बाढ़ कवर की और कई राजनैतिक हिंसाओं में रिपोर्टिंग की. लेकिन शाजिला कहती हैं कि वो 2 जनवरी, 2018 को हुई घटना को कभी भूल नहीं पाएंगी. उनका कहना है कि नेताओं को मीडिया की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए.

2 जनवरी से शुरू हुआ ये विरोध प्रदर्शन खतरनाक रूप ले रहा है. थ्रिसुर में बड़े पैमाने पर महिलाओं के मंदिर में जाने का विरोध हुआ. अलप्पुज़्ज़ा के मवेलिक्कारा तालुक ऑफिस पर प्रदर्शनकारियों ने हमला किया. तो वहीं तिरूवनंतपुरम में भाजपा और सीपीएम के कार्यकर्ताओं में झड़प हो गई. पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और वाटर कैनन का भी इस्तेमाल किया. प्रदर्शनकारियों ने कई रास्ते भी बंद कर दिए. इस प्रदर्शन में एक व्यक्ति की मौत हो गई है फिर भी लोगों को अक्ल नहीं आई है. अब भी केरल में हालत सुधरने की स्थिति में नज़र नहीं आ रहे हैं.

पत्रकारों का काम ही परिस्थितियों की यथास्थिति जानकारी लोगों तक पहुंचाना होता है. कहीं पर कुछ भी हो पत्रकार अपने काम के प्रति संजीदगी दिखाता नज़र आता है फिर भी उसे बार-बार टारगेट किया जाता है. झारखंड में हुए नक्सली हमले के दौरान भी दूरदर्शन के कैमरापर्सन की मौत हो गई थी. उन्होंने भी हिम्मत दिखाते हुए आखिरी समय तक अपना काम पूरी ईमानदारी के साथ किया था. अपनी मां के लिए रिकॉर्ड किया उनका वीडियो तब वायरल हुआ था. कैमरापर्सन शाजिला की फोटो भी आज वायरल हो रही है. उन्होंने भी हार नहीं मानी और खुद पर हमला होने के बाद भी अपना काम करती रहीं.