रामायण सर्किट से जुड़े बिहार के स्थलों के विकास के लिए राशि का मामला लगभग एक साल से लटका हुआ है। केंद्र सरकार ने इसकी विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) दूसरी बार संशोधन कर मांगा है।

यही नहीं बिहार सरकार द्वारा भेजे गए 103 करोड़ के प्रस्ताव में कटौती कर इसे मात्र 37 करोड़ कर दिया है। हालांकि राज्य सरकार ने कम से कम 40 करोड़ की मांग करते हुए नया प्रस्ताव बनाकर इसी सप्ताह पर्यटन मंत्रालय को भेजा है।

उम्मीद है इस पर मुहर लग जाये। वैसे राज्य के पर्यटन मंत्री प्रमोद कुमार इसबार खुद केंद्रीय पर्यटन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) केजे अल्फॉन्स से मुलाकात कर बिहार के प्रस्ताव पर मुहर लगाने पर बात करेंगे। उन्होंने 10 जनवरी को मुलाकात के लिए समय मांगा है। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री ने नेपाल से लेकर रामेश्वरम तक रामायण सर्किट के विकास की घोषणा की थी। इसके तहत बिहार से भगवान राम व माता सीता से जुड़े स्थलों के विकास के लिए ‘स्वदेश दर्शन योजना’ में डीपीआर मांगी गयी। पर्यटन विभाग ने फरवरी में डीपीआर बनाकर भेजा।

पर्यटन मंत्रालय ने उसमें कुछ संशोधन कर दोबारा इसे भेजने को कहा। इसके बाद अप्रैल में 103 करोड़ का संशोधित डीपीआर भेजा गया। सितंबर में पर्यटन मंत्रालय ने पदाधिकारियों व विशेषज्ञों का एक दल भेजा, जिसने प्रस्तावित स्थलों का का दौरा किया। सूत्रों के अनुसार दल ने अपनी रिपोर्ट में कई स्थलों पर खर्च को गैर जरूरी बताया। रिपोर्ट के बाद केंद्र ने दिसंबर में डीपीआर में फिर संशोधन कर मांगा। साथ ही बिहार सरकार के प्रस्ताव में भारी कटौती कर दी। डीपीआर में भेजे गए सात स्थलों के विकास को तो पूरी तरह खारिज कर दिया।

सर्किट से देशभर में ये स्थल जुड़ने हैं

उत्तर प्रदेश : अयोध्या, शृंगवेरपुर, चित्रकूट
बिहार : सीतामढ़ी, बक्सर, दरभंगा, मधुबनी
बंगाल : नंदीग्राम, ओडिशा : महेंद्रगिरि
छत्तीसगढ़ : जगदलपुर, तेलंगना : भद्रावत
तमिलनाडु : रामेश्वरम, कर्नाटक : हंपी
महाराष्ट्र : नासिक और नागपुर, मध्य प्रदेश : चित्रकूट

इन प्रस्तावों को किया खारिज

प्रस्ताव मांगी गई थी राशि
1.पंथ पाकर धाम का विकास (सीतामढ़ी) 2 करोड़ 38 लाख
2. गौतम कुंड (दरभंगा) 7 करोड़ 18 लाख
3. गिरजा स्थान, फुलहर (मधुबनी) 7 करोड़ 35 लाख
4. नदवा (बक्सर) 2 करोड़ 58 लाख
5. बड़का नुआंव (बक्सर) 3 करोड़ 22 लाख
6. भभहर (बक्सर) 4 करोड़ 48 लाख
7. चरित्र वन (बक्सर) 3 करोड़ 13 लाख