दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष मालीवाल ने रात में शेल्टर होम का दौरा किया और वहां के स्टाफ के दुर्व्यवहार को देखकर बहुत नाराज हुईं.

इसके बाद उन्होंने फौरन द्वारका के पुलिस उपायुक्त से बात की, जिन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों की एक टीम सादी वर्दी में वहां भेजी. इन पुलिस अधिकारियों ने वहां पहुंचकर बच्चों के बयान दर्ज किए और शेल्टर होम के स्टाफ के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की.

पुलिस अधिकारियों ने शेल्टर होम पहुंचकर बच्चों के बयान दर्ज किए और स्टाफ के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की. दरअसल, केजरीवाल सरकार की सलाह पर दिल्ली महिला आयोग ने राष्ट्रीय राजधानी में स्थित सरकारी व निजी शेल्टर होम की जांच करने और इनमें सुधार के लिए सलाह देने के लिए एक विशेषज्ञ समिति गठित की थी.

इसके बाद 27 दिसम्बर 2018 को विशेषज्ञ समिति के सदस्यों ने नाबालिग लड़कियों के द्वारका स्थित एक निजी शेल्टर होम की स्थिति को देखने के लिए वहां का दौरा किया. इसमें आयोग की सदस्य प्रोमिला गुप्ता, फिरदौस खान, वंदना सिंह और एक बाहरी सदस्य ऋतु मेहरा शामिल रहे.

समिति ने शेल्टर होम में रहने वाली 6-9 साल, 10-13 साल व 13-15 साल की उम्र की लड़कियों से बात की और शेल्टर होम में रहने के उनके अनुभव को जानने की कोशिश की.

वहां रहने वाली बड़ी उम्र की लड़कियों ने बताया कि उनको शेल्टर होम में सारे घरेलू काम करने पड़ते हैं. शेल्टर होम में स्टाफ की समुचित व्यवस्था न होने की वजह से बड़ी लड़कियों को छोटी लड़कियों की देखभाल भी करनी पड़ती है. बड़ी लड़कियों से बर्तन धुलवाए जाते हैं, कमरे और टॉयलेट साफ करवाए जाते हैं और किचन के दूसरे काम करवाए जाते हैं. समिति ने पाया कि शेल्टर होम में 22 लड़कियों के लिए केवल एक ही रसोइया है और बच्चियों ने भी बताया कि उनको दिए जाने वाले खाने की गुणवत्ता भी खराब होती है.

समिति यह देखकर चकित रह गई कि घर में रहने वाली छोटी-छोटी बच्चियों को बहुत कड़ी सजा दी जाती है. बड़ी लड़कियों ने बताया कि कोई बात न मानने पर छोटी बच्चियों को बहुत गंभीर और कड़ी सजा दी जाती है, जिससे सब लडकियां डर कर रहती हैं. उन लड़कियों ने समिति के सदस्यों को बताया कि उनको अनुशासन में रखने के नाम पर शेल्टर होम वाले उनको जबरदस्ती मिर्च खिलाते हैं.

यह बात बहुत ही डरावनी थी कि शेल्टर होम की महिला स्टाफ सजा के नाम पर बच्चियों के गुप्तांगों में मिर्ची डाल देती हैं. कमरे साफ न करने, स्टाफ की बात न मानने पर बच्चियों को और भी दूसरी सजाएं...जैसे स्केल से पिटाई करना आदि. इसके अलावा गर्मियों और सर्दियों की छुट्टियों में बच्चियों को घर नहीं जाने दिया जाता है.

समिति के सदस्य यह देखकर भौचक्के रह गए और उन्होंने इस बारे में दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल को बताया. इसके तुरंत बाद मालीवाल उसी रात को 8 बजे शेल्टर होम पहुंच गईं. आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल वहां पर स्टाफ के दुर्व्यवहार को देखकर बहुत गुस्सा हुईं. उन्होंने फौरन द्वारका के पुलिस उपायुक्त से बात की, जिन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों की एक टीम सादी वर्दी में वहां भेजी. इन पुलिस अधिकारियों ने वहां पहुंचकर बच्चों के बयान दर्ज किए. इस मामले में शेल्टर होम के स्टाफ के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की गई.

आयोग की अध्यक्ष ने महिला और बाल विकास मंत्री को भी मामले से अवगत कराया. साथ ही निजी शेल्टर होम में चल रही गड़बड़ियों और उनके स्टाफ के दुर्व्यवहार के बारे में बताया. महिला और बाल विकास मंत्री भी शेल्टर होम की बदतर व्यवस्था को सुनकर सन्न रह गए और उन्होंने तुरंत बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष और महिला एवं बाल विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को वहां जाने का आदेश दिया.

उन्होंने शेल्टर होम में फैली गड़बड़ियों की जांच की थी. बच्चियों ने आयोग से अपील की कि उनको वहां से दूसरी जगह न भेजा जाए, क्योंकि उनका स्कूल शेल्टर होम के पास है. इसलिए आयोग ने बाल कल्याण समिति से आग्रह किया कि बच्चों को दूसरी जगह न भेजा जाए, बल्कि शेल्टर होम के स्टाफ को हटाया जाए और व्यवस्था ठीक की जाए. फिलहाल सरकार इस मामले में जांच बैठाने पर विचार कर रही है.

उस दिन दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल विशेषज्ञ समिति के सदस्यों के साथ रात से लेकर सुबह तक शेल्टर होम में रुकी रहीं. बच्चों की सुरक्षा के लिए दिल्ली महिला आयोग की काउंसलर की एक टीम और सादी वर्दी में दिल्ली पुलिस के जवान 24 घंटे शेल्टर होम में तैनात किए गए. दिल्ली महिला आयोग लगातार शेल्टर होम की स्थिति पर नजर रख रहा है.