देश के कई राज्यों में प्लास्टिक या पोलीथिन कैरी बैग पर प्रतिबंध तो है, लेकिन जनजागृति के अभाव में जमीन पर इसका असर कम ही देखा जा रहा है। पृथ्वी के पर्यावरण को बिगाड़ने में इनकी बहुत बड़ी भूमिका है। 

एक पोलिथिन बैग तैयार करने के लिए सिर्फ चौदह सेकंड ही चाहिए, लेकिन इसे नष्ट होने में चौदह हजार साल तक लग सकते है। एक बार प्रयोग कर फेंके गए पोलिथिन बैग धूल और मिट्टी के साथ ज़मीन में दब जाते हैं और बारिश का पानी जमीन के भीतर नही जाने देते। जमीन का वह टुकड़ा धीरे-धीरे बंजर हो जाता है। शहरों में नालियों के जाम होने, बरसात का पानी जमा होने और बेसहारा पशुओं की मौत की भी बड़ी वजह प्लास्टिक ही है। 

पर्यावरण को दूसरा बड़ा खतरा व्यवसायियों और राजनीतिक दलों द्वारा प्रचार के लिए लगाए जाने वाले फ्लेक्स बोर्डों से है। पॉलीविनील क्लोराइड से बने ये फ्लेक्स बैनर हवा और मिट्टी को दूषित करने के अलावा कैंसर और बांझपन जैसे रोग पैदा करते हैं। ये ऐसे कचरे हैं जिन्हें नष्ट नहीं किया जा सकता। इन्हें जलाने से निकलने वाले जहरीले डाइऑक्सिन और फुरान गैस कैंसर जैसे कई असाध्य रोगों के कारण बनते हैं। जिन राज्यों ने इनके इस्तेमाल को प्रतिबंधित किया है, वहां भी इनके निर्माण पर कोई रोक नहीं है। इससे उन सरकारों की नीयत का पता चलता है। 

वैसे पर्यावरण को बचाने की ज़िम्मेदारी सरकारो के अलावा हम नागरिकों की भी है। हम बस इतना करें कि जब भी बाहर निकले, जूट या कपडे का एक थैला साथ रख लें। कुछ खरीदें तो पॉलिथीन को ना कहें और उसे अपने थैले में डाल लें। विज्ञापन के लिए फ्लेक्स की जगह कपड़ों के बैनर्स का इस्तेमाल करें और दूसरों को भी ऐसा करने को प्रेरित करें !

अपने देश और धरती के असंख्य उपकारों के बदले इतना तो हम कर ही सकते हैं।