प्रियंका से इतना काहे घबराते हो भाई राहुल से तो तुमको राजनीति सीखने की जरूरत। वे फेल नहीं हुए पास होकर ट्रिपल हुए।

अवलम्बित कुपात्रा जी राहुल तुम्हारी तरह नकली बाप की बैसाखियों पर नहीं खड़े हैं। प्रियंका कॉन्ग्रेस के राहुल के नेतृत्त्व में बेहतर प्रदर्शन के बाद आई है। वैसे राजनीति में वे कब नहीं थी। मछली के बच्चो को तैरना सीखने की जरूरत नहीं होती वे जन्मजात तैराक होते हैं। सबको हक है अपने हिसाब से व्यवसाय, सेवा चुनने का। कोई परिवार से अगर योग्य नहीं होता बतौर आपके तो अयोग्य भी नहीं होता। सबमें उसका नूर, सबमें देशभक्ति।

छोड़ो ये नफरत की राजनीति राहुल से सीखो मैं मायावती और अखिलेश का आदर करता हूँ, अखिलेश उम्र में छोटे हैं उनसे। अब तुम सब राहुल से राजनीति सीखो। वे बाप दादा कोसने की राजनीति नहीं करते। जिस गन्दी राजनीति का रायता आकर फैलाया है समेटो इसे।

प्रियंका कोई तोप है क्या जिससे उड़ जाओगे स्वागत करो उसका काँपते बौखलाते क्यों हो? बधाई दो उसको। वह एक बेहतरीन नेता साबित होगी उसका भाई उसकी ताकत बनेगा। परिवार का मेनिया हो गया है आपको। आपकी घिग्घी क्यों बंधती है परिवार से। वह एक संस्कारी आदर्श परिवार है जो भारत का गौरव बढ़ाता रहा है। क्या गुलाम नबी, राजबब्बर, ज्योतिरादित्य, सचिन पायलट, खड़गे, सिब्बल, मीरा कुमार, मुकुल वासनिक, मनमोहन आदि उनके परिवार के हैं। पार्टी में प्रियंका से पहले आठ नो महासचिव हैं। वह अपने कार्यकर्ताओं की इतनी लंबी मांग के बाद बनी हैं।

65 साल में कॉन्ग्रेस के परिवार से कुल तीन प्रधानमंत्री बने जिसमें राजीव गांधी तो राजनीति में आना तक पसंद नहीं करते थे। सोनिया खुद पी एम की कुर्सी ठुकरा चुकी है। सत्ता की हवस हड़क नहीं उभरी है इस परिवार के लोगों को। परिवार का आभामण्डल यूँ ही नहीं बनता, कुर्बानियों से बनता है।

परिवार परिवार का राग अलापने कोसने पीटने वाले मोदी क्या एक दिन को भी अब जब वे पूरी तरह असफल हुए भाजपा के किसी दूसरे व्यक्ति को गद्दी दे पाएंगे। जिन्होंने उन्हें चमत्कारी बनाकर कर उतारा क्या आर एस एस के संचालक को ही दे पाएँगे। बड़ी-बड़ी बोलने हांकने से कोई बड़ा नहीं हो जाता। वे सोनिया के पासंग भी नहीं उतरते। भले भाजपा उन्हें जादूगर समझती रहे या बताती फिरे। क्योंकि भोग से त्याग हमेशा बड़ा है।

 

 


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