कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने बहन प्रियंका गांधी वाड्रा को पार्टी महासचिव नियुक्त किया है। उन्हें पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रभार दिया गया है। 47 वर्षीय प्रियंका 1999 से हर लोकसभा चुनाव में प्रचार करती रही हैं।

वे भाई राहुल के लिए अमेठी में और मां सोनिया गांधी के लिए रायबरेली में रैलियां करती हैं। लेकिन पार्टी में उन्हें पहली बार कोई पद दिया गया है। पिछले कई वर्षों से प्रियंका को सक्रिय राजनीति में लाने की कांग्रेस के नेता मांग करते रहे हैं।

2014 में नरेंद्र मोदी ने गुजरात के वडोदरा के साथ-साथ पूर्वांचल की सबसे अहम सीट बनारस से चुनाव लड़ा और जीता। बाद में उन्होंने बनारस को चुना और वडोदरा सीट छोड़ दी। यही वजह है कि राहुल ने यहां भाजपा को यहां हाईप्रोफाइल प्रचार में सीधी टक्कर देने के लिए प्रियंका को पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया है।

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि प्रियंका गांधी को रायबरेली सीट से उतारा जा सकता है। अभी यहां से उनकी मां और यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी चार बार से सांसद हैं। अस्वस्थता के चलते उन्होंने 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में पार्टी के लिए प्रचार नहीं किया था।

सिंधिया भी महासचिव बने

मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत में अहम भूमिका निभाने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया को भी कांग्रेस महासचिव बनाया गया है। उन्हें पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं, अशोक गहलोत की जगह केसी वेणुगोपाल को संगठन-महासचिव बनाया गया है। वेणुगोपाल कर्नाटक के प्रभारी भी होंगे। वहीं, राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद को उत्तर प्रदेश की जगह हरियाणा का प्रभार दिया गया है।

हम हमेशा फ्रंटफुट पर खेलेंगे: राहुल

प्रियंका को यह नई जिम्मेदारी दिए जाने पर राहुल गांधी ने भी टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि हम हमेशा फ्रंटफुट पर खेलेंगे. कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा ने कहा, ‘‘प्रियंका जी की नियुक्ति से लोगों में आशा का संचार होगा। लोग दमखम के साथ उत्तर प्रदेश में पूर्वी क्षेत्र के साथ-साथ अन्य जगहों पर लड़ेंगे। उनके आने से कार्यकर्ताओं में जोश बढ़ेगा। राहुल गांधी ने जो कहा वो पूरा किया। प्रियंका की नियुक्ति इस बात का संकेत है कि आने वाला समय कांग्रेस के लिए अच्छा होगा।''