मोदी सरकार के कार्यकाल दौरान सरकार का क़र्ज़ 54.90 से बढ़कर हुआ 82 लाख करोड़ के पार हो गया है। 

केंद्र में इस समय मोदी सरकार सत्ता पर विराजमान है और मोदी सरकार का कार्यकाल भी इसी वर्ष कुछ महीनो बाद समाप्त हो जाएगा। देश एक तरफ लोकसभा चुनाव की ओर अग्रसर है तो दूसरी ओर इस चुनाव से पहले मोदी सरकार कई लोक-लुभावनी योजनाओं का एलान कर सकती है। हालांकि इससे पहले अब एक ऐसी रिपोर्ट सामने आई है जो आपको भौचक्का कर देगी।

दरअसल केंद्र सरकार इससे पहले की कोई योजना का एलान करे उसके सामने राजकोषीय घाटे की परेशानी बनी है। शुक्रवार को केंद्र की मोदी सरकार के क़र्ज़ के स्टेट्स रिपोर्ट का आठवा संस्करण जारी किया जिसमे पता चला कि मोदी सरकार के कार्यकाल के चार वर्षो के दौरान सरकार पर 49% फीसदी बढ़ गया है।

इस रिपोर्ट में पता चला है कि मोदी सरकार के कार्यकाल के दौरान सरकार पर क़र्ज़ 49 फीसदी बढ़कर 82 लाख करोड़ रूपए से अधिक हो गया है। गौरतलब है कि अगर मौजूदा आकड़ो को जून 2014 के आकड़ो से मिलाए तो क़र्ज़ में हुई बढौतरी आपको हिलाकर कर रख देगी। इस समय सरकार पर 82,03,253 करोड़ रूपए का क़र्ज़ है। वही यही क़र्ज़ जून 2014 में 54,90,763 करोड़ रूपए था।