पीएम मोदी ने कर्नाटक में सत्तारूढ़ गठबंधन के शासन पर किसानों के साथ धोखा करने का आरोप लगाया और दावा किया कि उन्होंने लाखों किसानों के लिए ऋण माफी का वादा किया था,

लेकिन अब तक केवल 800 किसानों को लाभान्वित किया गया है।

पीएम मोदी का दावा है कि केवल 800 किसानों ने ही कृषि ऋण माफी का लाभ उठाया है। उनके इस दावे का आधार 13 दिसंबर को टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित एक रिपोर्ट है, जिसमें यह बताया गया था कि कर्नाटक सरकार ने 800 किसानों को कृषि ऋण माफी योजना के लिए राशि वितरित की है। इसमें आगे कहा गया है, "सहकारिता मंत्री बंदेपा काशमपुर ने कहा कि 5 जुलाई को सीएम द्वारा घोषित योजना का लाभ केवल 800 किसानों ने उठाया है।"

लेकिन उसके बाद कई रिपोर्टें आई हैं जो कर्नाटक सरकार द्वारा ऋण माफी की प्रगति को दर्शाती हैं। NDTV द्वारा 19 दिसंबर, 2018 को एक रियलिटी-चेक रिपोर्ट में कहा गया है कि लगभग 27,000 कर्नाटक किसानों को लगभग 150 करोड़ रुपये की कुल राशि के सहकारी बैंक ऋण माफी प्रमाणपत्र प्राप्त हुए हैं। हालाँकि ऋण सीमा को प्रत्येक परिवार पर 2 लाख रुपये किया गया था जबकि यह प्रारंभिक दौर में 50,000 रुपये प्रति ऋण है।

"द हिंदू" द्वारा 28 दिसंबर को प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अब तक विशेष रूप से सहकारी क्षेत्र के लगभग 70,000 किसानों ने योजना का लाभ उठाया है और कुल छूट लगभग 348 करोड़ रुपये है।

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी का दावा है कि कर्नाटक सरकार द्वारा वादा की गई ऋण माफी से केवल 800 किसानों को लाभ हुआ है। भले ही कई मीडिया आउटलेट्स ने टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के बाद अपडेट किए गए आंकड़े प्रकाशित किए हों, लेकिन पीएम मोदी ने पुरानी संख्या को ही प्रचारित करने के लिए चुना।