सीबीआई ने सिंभौली शुगर्स लिमिटेड, उसके चेयरमैन गुरमीत सिंह मान, डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर गुरपाल सिंह और अन्य के खिलाफ 97.85 करोड़ रुपए की कथित बैंक कर्ज धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है. सिंभौली शुगर्स लिमटेड देश की सबसे बड़ी चीनी मिलों में से एक है.

बताया जा रहा है कि ये फर्जीवाड़ा 109.08 करोड़ रुपए का है जो ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स (ओबीसी) से जुड़ा है.

एजेंसी ने कंपनी के सीईओ जी एस सी राव, सीएफओ संजय तापड़िया, एक्जक्यूटिव डायरेक्टर गुरसिमरन कौर मान और पांच गैर-कार्यकारी निदेशकों के खिलाफ मामला दर्ज किया है. गुरपाल सिंह पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के दामाद हैं.

सीबीआई के प्रवक्ता अभिषेक दयाल ने बताया कि एजेंसी ने निदेशक के घर, कारखाने और दिल्ली, हापुड़ और नोएडा स्थित कंपनी के कॉरपोरेट व कार्यालयों सहित आठ ठिकानों पर तलाशी ली.

फर्जीवाड़े की यह जांच दो मामलों में चल रही है. पहला मामला 97.85 करोड़ रुपए का है जिसे 2015 में फ्रॉड घोषित कर दिया गया. दूसरा कॉरपोरेट लोन का मामला 110 करोड़ का है जिसे पिछला लोन चुकाने के लिए दोबारा पेमेंट किया गया.

दूसरा लोन 29 नवंबर 2016 को एनपीए घोषित किया गया. सीबीआई की एफआईआर कॉपी के मुताबिक एनपीए घोषित करने का यह वाकया नोटबंदी के ठीक 20 दिन बाद किया. बैंक को कथित रूप से 97.85 करोड़ का घाटा बताया जा रहा है, जबकि असल घाटा 109.08 करोड़ रुपए के आसपास का है. कर्ज देने वाले ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स (ओबीसी) ने 17 नवंबर 2017 को इस बाबत शिकायत दर्ज कराई थी लेकिन सीबीआई ने चीनी मिल के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के तहत 22 फरवरी को मामला दर्ज किया.

एफआईआर के मुताबिक ओबीसी ने 2011 में शुगर कंपनी को 148.60 करोड़ रुपए का लोन दिया. रिजर्व बैंक के एक स्कीम के तहत लोन 5,762 गन्ना किसानों को पैसा चुकाने के लिए दिया गया. सीबीआई डायरेक्टर दयाल ने बताया कि लोन का पैसा 'बेइमानी और फर्जीवाड़ा करते हुए कंपनी ने अपनी जरूरतों पर खर्च कर दिया.'

31 मार्च 2015 को कंपनी का लोन एनपीए घोषित कर दिया गया जबकि 13 मई 2015 को बैंक ने आरबीआई को 97.85 करोड़ के फर्जीवाड़े की सूचना दी. ओबीसी ने अपने आरोप में कहा है कि एनपीए के बावजूद 28 जनवरी 2015 को कंपनी को 110 करोड़ का लोन पास कर दिया गया, वह भी 97.85 करोड़ के पुराने लोन को चुकाने के लिए.

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